Skip to main content

Posts

रसचक्र की नवीं बैठकी

27 मई 2017 को रसचक्र की नवीं बैठकी संपन्न हुई. बैठकी में लगभग चौदह लोगों ने शिरकत की. कई भाषाओँ की रचनाओं का पाठ किया गया जिनमें गद्य, पद्य तथा गीत भी शामिल थे. पढ़े जाने वाली रचनाओं में भारतीय और विदेशी भाषाओँ के कवि और लेखकों की रचनाएँ शामिल हैं. अशोक वाजपेयी, कुँवर नारायण और पाब्लो नेरुदा की अनूदित कविताओं का पाठ किया गया. मंटो के खतों के कई हिस्से भी इस बार की रसचक्र  की बैठकी का हिस्सा रहे, वहीँ कार्ल सगान के निबंध 'अ पेल ब्लू डॉट' का पाठ किया गया. रसचक्र की बैठकी का एक आकर्षण रहा टिम अर्बन द्वारा किया गया 'Fermi's paradox' का वर्णन. अलग-अलग तरह की आकाशगंगाओं में जीवन के चिह्न क्यों नहीं हैं, इस विषय पर बहुत दिलचस्प शैली में लिखी गई रचना है यह. 'कलामे निस्वाँ' से मिसेज़ सीन. मीम. दाल द्वारा लिखित ‘अनोखी शादियाँ’ का पाठ हुआ. सुभद्रा कुमारी चौहान के इतिहास से संबंधित स्मृतियों का ज़िक्र भी किया गया तो नेहरु की वसीयत और उनके पत्रों का पाठ भी किया गया. साथ में पद्मावत और सूरसागर के एक पद का गायन हुआ. अंत हुआ हिम...

रसचक्र की आठवीं बैठकी

आज 16 अप्रैल, 2017 को रसचक्र की आठवीं बैठकी सम्पन्न हुई। बैठकी में 17 व्यक्तियों ने शिरकत की। कई भाषाओं की रचनाओं का पाठ किया गया जिनमें गद्य, पद्य तथा गीत शामिल थे। पढ़े जानेवाले रचनाकारों में भवानीप्रसाद मिश्र, अष्टभुजा शुक्ल, गोविंद माथुर, कृष्णा सोबती, भगवत रावत, नरेश सक्सेना, नवनीता देवसेन, फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, कुँवर नारायण, मुक्तिबोध, महमूद दरवेश, जाफ़र जटल्ली, इब्ने इंशा, निराला, हरिमोहन झा, विजेंद्र अनिल आदि सम्मिलित हैं। जाफ़र जटल्ली की दौरे ज़ुल्मत के खिलाफ लिखी कविताओं से रसिकों का परिचय उर्दू के शिक्षक अली जावेद जी की रोचक कहानियों और जटल्ली के अशआर के माध्यम से हुआ। फर्रुख सियर के अत्याचारों के विरुद्ध लिखे गए जाफ़र के अशआर बहुत मज़बूत हैं जिन्हें समकालीन आलोचकों द्वारा भुला दिया गया है। महमूद दरवेश की कुछ कविताओं - 'The rest of life', 'The law of fear', 'If we want to' का पाठ अंग्रेज़ी में ही किया गया। ये कविताएँ फिलिस्तीन की भयावह स्थिति को सामने लाती हैं। हरिमोहन झा की मैथिली कहानी 'सासुरक चिन्ह' के पाठ का श्रोताओं द्वारा भरपूर आनंद उठाया गया...

रसचक्र की सातवीं बैठकी

18 मार्च, 2017 को रसचक्र की सातवीं बैठकी संपन्न हुई थी। ध्यान रहे पिछले सात महीनों से यह बैठकी हर महीने एक बार की जाती है। इस बार की बैठकी में 21 लोग शामिल हुए थे। पढ़ी जानेवाली रचनाओं में कविताएँ, लेख और गीत शामिल थे । देवीप्रसाद मिश्र, अकबर इलाहाबादी, दुष्यंत कुमार, ताहिर फ़राज़, त्रिलोचन, फहमिदा रियाज़, जॉन एलिया, अवतार सिंह पाश, अशोक वाजपेयी, कुमार अंबुज, शिवमंगल सिंह सुमन आदि कवियों की कविताओं का पाठ किया गया। मिर्ज़ा शौक़ लखनवी की 'फ़रेबे इश्क' से कुछ अंश पढ़े गए । ओसिप मंदेलश्ताम की अनूदित कविता ('दुर्दिन है आज') का पाठ किया गया। भिखारी ठाकुर तथा बाबू रघुवीर नारायण द्वारा लिखे गए लोकगीतों का गायन हुआ । साथ ही, हरिवंशराय बच्चन की एक कविता को भी गाया गया। राष्ट्रवाद, हिन्दू धर्म (गाँधी), तथा राष्ट्रवाद की जेंडर विडंबनाएँ (तमार मेयर) जैसे लेखों को रसिकों के साथ साझा किया गया। महेश्वर दयाल की चर्चित रचना 'दिल्ली जो एक शहर है' के रोचक अंशों ने सबको खूब आनंदित किया । इस बार प्रायः सभी कविताओं और लेखों को पहले से चुनक...

Nina Donovan's Poem by Vandana Rag

Provide translation to English

रसचक्र की छठी बैठकी

कल यानी 26 फरवरी, 2017 को रसचक्र की छठी बैठकी संपन्न हुई. यह महीने में एक बार हो रही है. इस बार की बैठकी में 20 लोग उपस्थित थे. अकबर इलाहाबादी, मुक्तिबोध, कुँवर नारायण, केदारनाथ सिंह, ज्ञानेंद्रपति, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, दुष्यंत कुमार, रमाशंकर विद्रोही, बर्तोल्त ब्रेख्त, सुवीर मंडल, Primo Levi (1919-1987, Italian Jewish writer, and Holocaust survivor), Tadeusz Rozewicz (1921-2014, Polish poet), Maya Angelou (1928-2014, मशहूर अश्वेत अमेरिकी कवयित्री), Claude Mckay (1889-1948, जमैका के प्रसिद्ध कवि) आदि की प्रतिरोध के स्वरवाली रचनाओं का पाठ किया गया. अंग्रेज़ी  की रचनाओं में से एक 19 साल की अमेरिकी कवयित्री Nina Donovan की ट्रम्प के खिलाफ लिखी कविता का पाठ हुआ. एक और युवा कवयित्री नीलाशी शुक्ला की इराक विध्वंस पर लिखी कविता भी पढ़ी गई. 'पिता का पत्र पुत्री के नाम' का एक अंश भी सबने सुना. मिसेज़ सैय्यद मछली शहरी की 1937 की गद्य रचना में औरतों के मताधिकार आंदोलन का ज़िक्र था. आगे से हम सबको चयन पर और मेहनत करनी है. फोन का इस्तेमाल भी कम करना है.

नई प्रस्तुति के लिए स्क्रिप्ट पर काम

Rehearsal की गंभीरता